मौका परस्त

अपनी बलाएँ सारी औरों पे टालता है , मौका परस्त, अपना मतलब निकालता है। हो उसका स्वार्थ जिसमें, वह आज ही करेगा , गैरों के काम को वह , कल , कल पे टालता है। जानकी प्रसाद विवश

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